धीरे धीरे दम तोड़ रहा लालबाग़

जर्जर और बदहाल होता लाल बाग़

इंदौर । लाल बाग़ यानी सुन्दर, आकर्षक महल जिसे इंदौर शान भी कह सकते हैं. मध्य प्रदेश शासन की लगातार उपेक्षा के चलते लाल बाग़ बदहाल और जर्जर होता जा रहा है. 71 .63 में फैले इस महल परिसर और महल अपने सुनहरे इतिहास पर आंसू बहा रहा है.शासन के पुरातत्व विभाग का मानना है कि विधान सभा चुनाव की आचार संहिता के चलते थोड़ी ला पर वही ज़रूर हुई है.वहीँ स्वच्छता का तमगा अपने गले में लटकाये घूम रहा इंदौर नगर निगम भी काम ज़िम्मेदार नहीं है.लाल बाग़ देखने आने वाले पर्यटकों से शुल्क तो लिया जा रहा लेकिन उन्हें सुविधा-सुरक्षा देने के लिए कोई जवाबदेह नहीं है.कुछ स्थानीय नागरिकों मानना है कि नेहरू कला केंद्र कांग्रेस ने इसे नाम दिया और पंद्रह सालों से शासन में बैठी भाजपा ने जानबूझकर लालबाग़ की तरफ ध्यान नहीं दिया.

शहर का इतिहास लाल बाग जिसे शहर की शान भी माना जाता है, लापरवाही की वजह से खंडहर बनता जा रहा है। महल परिसर में प्रवेश करते ही दो बड़े मैदान दिखाई देते जहाँ, हर कदम पर कचरा ही कचरा दिखाई देगा. कुत्ते, सुअर के साथ कई आवारा पशु घूमते हैं। दूसरी तरफ प्रेमी जोड़ों ने लाल बाग़ परिसर को अपना रेग्युलर अड्डा बना लिया.इनके कारण परिवार वालों ने तो इस परिसर में आना बंद कर दिया है. बाएं मैदान में मौजूद बावड़ी में कचरा और जहरीला पानी इकट्ठा हो गया है। वहां बदबू और तरह-तरह के कीड़े-मच्छर पनप रहे हैं। बावड़ी पर जालिया लगी है पर दरवाजों पर कोई ताला नहीं लगा है जिसके कारण दुर्घटना हो सकती है। महल के बाई तरफ एक मंदिर भी है जिसके पीछे महल की टूटी चौखट का मलबा पड़ा है। महल की सुंदरता अंदर से बनाए रखी है, पर महल के द्वार पर सीलन आ रही है और खिड़कियां भी फूट रही है।

फिल्म शूटिंग भी हुई….

कुछ समय पहले पुरातत्व विभाग ने कलंग फिल्म की शूटिंग के लिए 15 दिन के लिए दिया था. फिल्म निर्माता ने सिर्फ शूटिंग के लिए रंग कराया था। फिल्म कलंग के निर्माताओ से 50 हजार रूपये किराया रोज़ लिए था। महल के बाहर की तरफ ओटले पर लगी रेलिंग टूट गई है।

पेड़ पौधे सूख रहे हैं टूट रहे हैं

एक ज़माने में यहाँ हज़ारों पेड़ थे और एक सुन्दर गुलाब पार्क भी था। गुलाब पार्क का क्या हुआ पता नहीं लेकिन अभी भी सैकड़ों पेड़ हैं जो देखरेख के अभाव में सूखते जा रहे हैं और इन में से कुछ पेड़ तो टूट भी रहे हैं. सूखे पेड़ गिरे हुए हैं। चारों और पत्ते, टॉफी के रैपर और कचरा फैला हुआ है। बगीचे में लगी लाइटों के लिए एमसीबी का बूथ लगा है, जिसमें बिजली के तार खुले हैं। बगीचे में आए बच्चों और पर्यटकों के लिए यह बूथ जानलेवा हो सकता है। सूचना देने वाले बोर्ड पर जंग लगा हुआ है। आरटीओ की पुरानी बिल्डिंग भी लाल बाग का ही हिस्सा है जहाँ राजा के दस्तावेज रखे जाते थे, यहाँ एक चौकीदार रहता है। चौकीदार के घर से नाली निकल रही है जिसका पानी बहकर महल के बगीचे में आता है।

नक्काशीदार जर्जर होती मुंडेरं

महल परिसर के पार्क में होल्कर कालीन नक्काशीदार मुँडेरें भी नष्ट हो रही है, अब बस उनका मलबा ही बचा है और कुछ जो रह गई है वह आने वाले समय में नष्ट हो जाएगी। बगीचे में एक मंदिर भी है जो कि बाहर से तो ऐतिहासिक खूबसूरत है पर उसके पीछे जाने पर उसकी सच्चाई दिखती है। मंदिर के तलघर में पानी जमा है इस कारण मंदिर की नींव को नुक्सान पहुँच रहा. कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। यहां पानी जमा होने के कारण मच्छर और कीड़े पनप रहे हैं।

ज़िम्मेदार (पुरातत्व) विभाग का जवाब

इंदौर के पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर के.एल. डाबी से जब लाल बाग़ की बदहाली के बारे में पूछा तो लगा वे कुछ जानते हैं लेकिन फिर भी बहाने वाला जवाब दिया. उन्हें इस पद पर साल भर से भी ज़्यादा समय हो गया है. उन्होंने कहा कि आचार संहिता हटने के बाद महल के बगीचे की साफ सफाई और महल की वॉटर प्रूफिंग कराई जाएगी. पूरे परिसर में कीटनाशक का भी छिड़काव कराएंगे.परिसर और महल की देखरेख के लिए कर्मचारी कम है। इस कारण धीरे धीरे काम होता है .पेड़ों की सुखी शाखाओं को बगीचे में ही रखा जाएगा.
प्रेमी जोड़ों पर होगी कार्रवाई:डिप्टी डायरेक्टर के.एल. डाबी ने बताया की बहुत जल्द लाल बाग़ सिर्फ पर्यटकों के लिए खोला जाएगा और बिना टिकट कोई परिसर में भी प्रवेश नहीं कर पाएगा.लाल बाग़ परिसर के बाहर अब टिकट काउंटर होंगे. सिर्फ महल देखना आए पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जाएगा. फालतू किसी को भी बैठने नहीं दिया जाएगा.

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