मुहाजिर होने का दर्द जानता हूँ मैं ,शंकर लालवानी

कंस्टीटूशन क्लब ऑफ़ इंडिया मे एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई | डॉयलोग्स विथ विक्टिम्स ऑफ़ एट्रोसिटीज ऑफ़ पाकिस्तान | जिसमे बीजेपी के नेता शंकर लालवानी ,विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे ,हरी सिंह सोढ़ी और आदि लोगो ने हिस्सा लिया कार्यक्रम का मक़सद लोगो को उन लोगो से रूबरू करवाना था जो यहाँ पर विस्तापित हुए हैं ,भारत मे लॉन्ग टर्म वीसा पर यहाँ रह रहे हैं | दिल्ली मे मजनू के टीले नामक जगह पर | प्रोग्राम मे संसद शंकर लालवानी ने बताया की किस तरह से उनके परिवार पाकिस्तान से भारत आया था सब कुछ छोड़ कर |

वहां पर उनकी कुल देवी की मूर्ति रह गयी थी, जिसे लेने उनके बड़े पिताजी पाकिस्तान गये थे लेकिन लौटकर वापस नहीं आ पाए ,हालाकि की शंकर लालवानी की पैदाइश भारत की ही हैं, लेकिन मुजाहिर होने का दर्द जो उनके परिवार ने सहा हैं , शंकर लालवानी ने उसे देखा भी हैं और महसूस भी किया हैं | इंदौर और भोपाल मे बहुत काम किया हैं इस पर शंकर लालवानी ने अपनी नौकरी छोड़ कर समाज सेवा मे आगये थे काफी समय पहले और आज यहाँ तक पहुंचे हैं अपनी मेहनत के बलबूते पर और आज ये मकाम हासिल किया हैं | शंकर लालवानी ने सिंधी मे भी सम्बोधित किया ,कुछ सिंध से आए लोगो को जो सिर्फ सिंधी भाषा ही जानते थे |

हमसे ज़बरदस्ती धर्म बदलने को कहा जाता था | हम दिवाली नहीं मना सकते थे वहां पडोसी देश मे ? हमारी बेटियों से ज़बरदस्ती निकाह किया जाता था |ताकि वो इस्लाम कबुल कर ले ? हम अपने मुर्दो को जला भी नही सकते थे उन्हे दफना ने के लिए कहा जाता था ? हमसे बुरा बर्ताव किया जाता था | इस्लाम को काबुल करने को कहा जाता था ज़बरदस्ती ?कट्टरता बहुत थी वहां पर दम घुट रहा था ,वहां हमारा |ये कहना था वहां मौजूद हिन्दू ,sindhii और sikh लोगो का जो पाकिस्तान अफगानिस्तान से यहाँ आये हैं| सवाल ये बीजेपी या कांग्रेस के लिए नहीं हैं | ये सवाल हैं इंसानियत पर आखिर क्यों कोई अपनी मर्ज़ी के बिना इस्लाम क़बूल करेगा|.

क्यों कोई अपना धर्म अपनी मर्ज़ी के बिना बदल लेगा और ज़बरदस्ती इस्लाम क़बूल करवा कर क्या कोई दूसरे इंसान के मन मे बैठे भगवान् को उसके अंदर से अलग कर सकता हैं| सिक्के के दोनों पहलु को देखे जाना चाहिए ,इंसानियत के तौर पर हमे बस इंसान ही बने रहना चाहिए हिन्दू या मुसलमान नहीं |धर्म घरों के अंदर का मामला हैं | इंसान की कबूलियत और पसंद का मामला हैं |एक दूसरे से नफरत करने का मामला नहीं हैं |आज जहा एक और सरकार की नीतियों पर उँगलियाँ उठ रही हैं वही दूसरी और ये लोग भी डरे हुए हैं की उन लोगो को हिन्दुस्तान मे क्यों नहीं रहने दिया जायेगा इन हिन्दू लोगो को ये लग रहा हैं की देश उनकी मुखालफत कर रहा हैं की उन्हे देश मे नहीं आने दिया जा रहा हैं |हालाकि जो भी इस देश मे 11 सालो से रह रहा हैं उसे इस देश की नागरिकता ज़रूर मिलेगी धर्म कोई भी हो |

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