राहत इन्दोरी की शायरी की गोल्डन जुबली ,परवीन अर्शी

इंदौर के हीरे की शायरी की गोल्डन जुबली मानेगी आज इंदौर मे|

उसे अब के वफ़ाओं से गुजर जाने की जल्दी थी,
मगर इस बार मुझ को अपने घर जाने की जल्दी थी,
मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहाँ हर एक मौसम को गुजर जाने की जल्दी थी।

राहत इन्दोरी शब्दों के बाज़ीगर अपने शब्दों को अलग अंदाज़ मे कहने का हुनर और सलीका कोई राहत इन्दोरी से ही सीखे ,अपनी बात को बड़े ही दमदार तरीके से कह देना किसी की भी सत्ता को हिला कर रख देने के लिए बहुत हैं |

अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआ है कोई आसमान थोड़ी है..

लगेगी आग तो आएगे घर कई ज़द मे
यहा पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है..

या फिर उनका ये शेर जो हर हिन्दुतानी को अपना सा लगता हैं की ..

जो आज साहिब-ए-मसनंद है कल नही होगे
किरायेदार है जाती मकान थोड़े है..

सभी का खून है शामिल यहा की मिट्टी मे
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है..

राहत इन्दोरी की शायरी को आज पूरे पचास बरस हो गए हैं |आज भी लगता हैं मानो कल ही की बात हो इंदौर की मिटटी मे ही कुछ ऐसा हैं, जो वह के लोग कुछ अलग ही तरह से निकलकर दुनिया भर मे झंडे गाड़ देते हैं अपने फन और हुनर के, चाहे वो MF हुसैन हो, रज़ा हो, सुमित्रा ताई आदि हो |

राहत राहत कुरैशी याने राहत इंदोरी का जन्म 1 जनवरी १९५० को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर मे रफतुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निसा बेगम के यहाँ हुआ था।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से की, जहाँ से उन्होंने अपनी हायर सेकंडरी पूरी की। उन्होंने 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज, से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल (मध्य प्रदेश) से उर्दू साहित्य में एमए पास किया। राहत को भोज विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

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राहत इंदौरी , इंदौर विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य के शिक्षाविद थे। वह विश्वविद्यालय में अपने छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे। इन सबके अलावा, वह पढ़ाई में भी शानदार थे और खेल में भी बेहतरीन थे। उन्हें कॉलेज और स्कूल दोनों में हॉकी और फुटबॉल के कप्तान के रूप में चुना गया था।

राहत इन्दोरी एक भारतीय बॉलीवुड गीतकार और उर्दू भाषा के कवि हैं। वह उर्दू भाषा के पूर्व प्रोफेसर और चित्रकार भी हैं। इसके पहले वे इंदौर विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य के शिक्षाविद थे। अपनी शायरी की वजह से उन्हे राहत इंदौरी के नाम से जाना जाता है|

डॉ राहत इंदौरी ने अपने कॉलेज में 19 साल की उम्र में अपनी पहली कविता का पाठ किया। वह उन उर्दू कवियों में से एक हैं जो सरल और आकर्षक भाषा में कविता लिखते हैं और उनके दोहों ने कई दिल जीते हैं। शायरी को कहने के अलग अंदाज़ ने बना दिया उन्हे सबसे अलग और मकबूल |वह मुशायरों की एक विश्व स्तर पर जानी मानी हस्ती हैं, और ग़ज़ल सुनाने का एक अनोखा तरीका पेश करती हैं, जो अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है।

इंदौरी ने पिछले 40 – 45 वर्षों से मुशायरा और कवि सम्मेलन में प्रस्तुति दी। कविता पाठ करने के लिए उन्होंने व्यापक रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा की है। उन्होंने भारत के लगभग सभी जिलों में काव्य संगोष्ठियों में भाग लिया है और अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मॉरीशस, केएसए, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि में भी सौ बार यात्रा कर चुके हैं। दो बार द कपिल शर्मा शो में आ चुके हैं जिसमे राहत इंदौरी को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।

डॉ राहत इंदौरी के गीतों का अब तक 13 से अधिक बॉलीवुड फिल्मों में उपयोग किया गया है, जिसमें ब्लॉकबस्टर मुन्नाभाई एमबीबीएस भी शामिल है। कविता और शायरी में एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व बनने से पहले ,वे अपने काम के लिए दुनिया भर में कई सम्मानों को प्राप्त कर चुके हैं |

राहत इन्दोरी की किताबे जो उन्होने लिखी हैं रुत ,दो कदम और सही , मेरे बाद धुप बहोत है ,चांद पागल है ,मौजूद नाराज़ |

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