बंटवारे मे अपनी कौम नहीं, अपना मुल्क चुना मेरे पापा ने ,मुझे गर्व हैं अपने पिता पर परवीन अर्शी

हैप्पी फादर्स डे ,मेरा ये अवार्ड डेडिकेट करना चाहूँगी अपने पापा को,उनकी मेहनत को ,उनके होसले को उनकी हिम्मत को |
फादर्स डे ,,याने एक पिता और उसकी औलाद एक दिन ,यूँ तो हम हर वक़्त माँ को ही सबसे ज़्यादा प्यार देते हैं लेकिन उस पिता का क्या जो हमे अपनी ख़ुशियाँ दाव पर लगा कर , हमारी ज़िन्दगी सवार देता हैं लेकिन उसे कोई क्रेडिट नही दिया जाता हैं, उसकी क़ुर्बानियों का ,धुप धूल गर्मी सर्दी हर मौसमों की मार झेलकर भी वो दोजुन की रोटी कमाने जाता हैं परिवार के लिए, बच्चो के लिए ,उनके मुस्तकबिल के लिए |

मेरे लिए आज का फादर्स डे बहुत ही ज़्यादा मायने रखता है |क्यों की आज के दिन मुझे अपने काम के लिए अवार्ड मिल रहा हैं मातृश्री अवार्ड|  जिसकी वजह मेरे पिता हैं, जिनकी की मेहनत का नतीजा और उनके किये गए प्रयासों का फल ही हैं ,जिसकी वजह से हम आज इस मकाम तक पहुंच पाए |  सोलह साल तक पलंग पर बैठकर अपने घर परिवार को चलना या पालना आसान नहीं था, एक ऐसे शख्स के लिए जिनको हार्ट की बीमारी थी ,सोलह साल मे सोलह दिल के दौरे झेल चूका इंसान कितना हिम्मतवाला होगा , जो अपने बच्चो के खातिर जी रहा था , वो शख्स कोई और नहीं मेरे पापा थे |

बच्चो की पढाई के लिए उन्होने अपनी सारी दौलत दाव पर लगा दी |उस ज़माने मे जब लड़कियों को बड़ी होते ही शादी करने का चलन था | तब हमारे बेहतर मुस्तक़बिल के लिए मेरे पापा ने हमे पढ़ाया और काबिल बनाया , पर्दा (बुरखा) सिस्टम होने के बावजूद हमे इन् प्रथाओं से दूर रखा हमे ,हमे दौलत ना सही ,लेकिन इल्म की बेशुमार दौलत दे गए वो हमे, अच्छे संस्कार अच्छी तरबियत दे गए | मैं अपने पापा को बहुत मिस करती हूँ | वैसे ज़्यादा वक़्त नहीं बिताया मैने उनके साथ, बहुत छोटी उम्र दस साल की उम्र मे ही अकेला छोड़ गए थे वो मुझे |

लेकिन कही न कही उनकी छाप रह गई मुझ पर, उनकी कुछ बाते, उनके कुछ प्रिंसिपल्स आ गए मुझ मे भी, ज़िन्दगी को अपनी शर्तों पर जीने का अंदाज़ उन्ही से सीखा, निडर बेबाकी से अपनी बात कहना और सच बोलना हमेशा यही पाया हैं विरासत मे मैने ,देश से बहुत प्यार करते थे वो ,अपनी सरज़मीं और अपनी वतन की मिटटी से बेहद लगाव था उन्हे | बंटवारे मे अपनी कौम नहीं अपना मुल्क चुना मेरे पापा ने मुझे गर्व हैं अपने पिता पर |

आज के दिन मैं ,याने फादर्स डे के दिन, मैं पत्रकारीयता के क्षेत्र का सबसे बड़ा और 43 वर्षो से दिए जाने वाले मातृश्री अवार्ड को पाओगी ये मेरे लिए बड़ी गर्व की बात हैं | मैने अपने पिता की मेहनत, उनकी ख्वाइश पूरी करदी, और दिखा दिया दुनिया को की एक बेटी भी पिता की उम्मीदों पर खरी उतर सकती हैं उनका नाम रोशन कर सकती हैं| ये अवार्ड डेडिकेट करुँगी अपने पापा को उनके सपनो को उनकी मेहनत को उनके जज़्बे को | हैप्पी फादर्स डे |

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