दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई से भी ऊंचा है,मेहरानगढ का क़िला

भारत का एक अपना अलग ही इतिहास रहा हैं| इसे सोने की चिड़िया या फिर रहस्यों या कथाओ का गढ़ माना जाता हैं| यहाँ के अद्भुत क़िले मंदिर, मस्जिद एक अलग ही अद्भुत कलाकृति का नज़ारा पेश करती हैं| इसी कड़ी मे आता हैं मेहरानगढ का क़िला जो की भारत के राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित है।यह किला भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है और भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है।मेहरानगढ़ किले के बारे मेंकहा जाता हैं की ये 500 साल से पुराना है यह किला| पन्द्रहवी शताब्दी का यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से १२५ मीटर ऊँचाई पर स्थित है| और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है। इससे बनवाया था जोधपुर के राजा, राव जोधा ने जो राजा रणमल की २४ संतानों मे से एक थे। वे जोधपुर के पंद्रहवें शासक बने।

शासन की बागडोर सम्भालने के बाद राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है। तो उन्होने एक पहाड़ी पर नया किला बनाने की सोची | इस पहाड़ी को भोर चिड़ियाटूंंक के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहाँ काफ़ी पक्षी रहते थे। राव जोधा ने 12 मई 1459 ई. को इस पहाडी पर किले की नीव डाली | महाराज जसवंत सिंह ने इसे पूरा किया। जोधपुर का मेहरानगढ़ किला 120 मीटर ऊंची एक पहाड़ी पर बना हुआ है। इस तरह से यह किला दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई (73मीटर) से भी ऊंचा है। कभी यहां थी शेरों की गुफाएं थी |

मूल रूप से किले के सात द्वार (पोल) (आठवाँ द्वार गुप्त है) हैं। प्रथम द्वार पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगी हैं। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाज़े , जालीदार खिड़कियाँ हैं। इनमें मोती महल,फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि शामिल हैं । इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह मौजूद है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी शामिल है।

जब राव जोधा ने राजस्थान की मसूरियां पहाड़ी पर किला बनाना प्रारंभ किया तो वहां पर उन्हें किसी बुरी बात की आशंका होने लगी।इसी पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध लोक देवता बाबा रामदेव जी के गुरु बालकनाथ जी की गुफा में जाकर उन्होंने इसका कारण पूछा तो उन्होंने राव जी को कहां कि किला इस पहाड़ी पर नहीं बनाकर वे कहीं और बनाएं। उन्ही दिनों रावजी इन पंचटेकरियां पर किला का निरीक्षण करते हुऐ वर्तमान सिघोंडि़यों की बाड़ी के पास के क्षेत्र पर पहुंचे जहां उन्होंने एक बकरी को एक बाघ से मुकाबला करते देखा। राव जी ने उसी क्षण निर्णय कर लिया कि वे किला इसी पहाड़ी पर बनाएंगे।आज भी यह स्थान सिघोंडि़यों की बाड़ी क्षेत्र के नाम से मशहूर है। कभी इस स्थान पर शेरों की गुफाएं हुआ करती थी।

किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे, जालीदार खिड़कियां हैं। हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी हैं यहाँ , अंग्रेजी फिल्म डार्क नाइट के कुछ हिस्से भी मेहरानगढ़ में फिल्माए गयी हैं बाद यह हॉलीवुड के लिए भी एक शानदार डेस्टीनेशन बन गया।यहां ब्रूस वेन को कैद करने, जेल पर हमला करने आदि के दृश्य फिल्माए गए थे।सलमान की फिल्म वीर की शूटिंग भी यही हुई थी ।हॉलीवुड फिल्म बेटमैन की शूटिंग भी हुई यहां।किले के अंदर है म्यूजियम भी ।आज भी इस किले में रहते हैं लोग,कहा जाता हैं की कि इस किले से दिखता है पाकिस्तान।

जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट में स्थित चामुंडा माता मंदिर को लेकर लोगों में बहुत आस्था है। ये मारवाड़ राजघराने की आराध्य देवी का मंदिर है। यहीं कारण है कि नवरात्र में माता के दर्शन करने पूरा शहर उमड़ पड़ता है।तीस सितम्बर 2008 को यहाँ एक हादसा भी हुआ था| मंदिर मे दर्शन करने के लिए यहाँ मंदिर से थोड़ा पहले संकरे मार्ग पर बड़ी संख्या में पुरुष कतार में खड़े थे। जबकि महिलाओं के लिए अलग मार्ग बनाया हुआ था।इस संकरे मार्ग पर सूर्योदय के समय यकायक कोई चिल्ला उठा कि दीवार गिर रही है। इतना सुनते ही भगदड़ मच गई। लोग इस संकरे मार्ग से बाहर निकलने को भागे।भारी भीड़ और संकरे स्थान के कारण लोग बाहर नहीं निकल पाए। भगदड़ में एक के बाद एक कर लोग नीचे गिरते रहे। देखते ही देखते मेहरानगढ़ में लाशों का अंबार लग गया था । इस हादसे में 216 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसमें से अधिकांश युवा लोग थे।

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