डॉ जमाल ए खान जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से डेनड्रिटिक सेल थरेपी का किया इजात

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे आज लाखो परिवार परेशान हैं,मानसिक और आर्थिक रूप से दुखी हैं।ऐसे मे जब कारगर उपचार नजर नहीं आता तब कोई भी ऐसा इलाज या अविष्कार जो कैंसर से निजात दिला सकता है तो उसे सरकार, जिम्मेवार विभाग और समाज को सिर आँखों पर लेना चाहिए। डॉ जमाल ए खान जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से डेनड्रिटिक सेल थरेपी (dendritik cell therapy )या कैंसर इम्यूनोथेरैपी (Cancer Immunotherapy) के क्षेत्र मे सरकारी नौकरी छोड़, गहन अध्यन और शोध से सर्व प्रथम भारत मे इससे सम्बंधित रिसर्च पेपर पब्लिकेशन किये।

पिछले 15 वर्षो मे इसमे उन्हें बड़ी सफलता भी मिली। होना तो ये चाहिए था कि 2004 से चल रहे डॉ जमाल ए खान के इस क्रान्तिकारी काम को मदद मिलती पर कुछ अड़चनों मे घिरे डॉ जमाल ने मजबूर होकर दिल्ली हाई कोर्ट मे अर्जी लगा रखी हैं ।डॉ जमाल के अनुसार डेनड्रिटिक सेल थेरेपी मे कोई ड्रग्स इस्तेमाल नहीं की गए हैं , परन्तु इसका लाइसेंस किसी और को दे दिया गया हैं |

इसराइल और अमेरिका जैसे देश ऐसे क्रन्तिकारी शोधो मे अति रूचि दिखाकर ना सिर्फ शोध राशि उपलब्ध कराते हैं |बल्कि रास्ते में आने वाली अड़चनों को हटाते हैं।यहाँ सरकार की सोच के विपरीत अनेक विभाग शोध कार्यो को आगे बढ़ने से रोक रहें हैं। ये ऐसा क्रन्तिकारी शोध है| जिससे देश चाहे तो अपने यहाँ कैंसर के इलाज के खर्चो का कम कर विदेशो मे भारत के इस अनुसन्धान से बड़ी राशि मे धन कमा सकता है |जो भारत मे कैंसर से पीड़ित कैंसर के मरीजों पर खर्च किया जा सकता है।

डॉ जमाल ने उम्मीद दिखाए हैं की सरकार इसका संज्ञान लेगी और ऐसे अनुसन्धान जो देश को हर तरह से लाभ पहुंचा सकता है और सबसे बढ़कर कैंसर से परेशान करोड़ो कैंसर रोगियों के जीवन मे उम्मीद की किरण के रूप मे पहुंच सकता है,आवश्यक कदम उठाएगी। डॉक्टर जमाल ए खान अपने लिये नहीं देश के गरीब कैंसर के मरीजों के लिये लड़ रहे हैं |

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