हिंदी की बेबाक लेखिका कृष्णा सोबती नहीं रही

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कृष्णा सोबती हिंदी की बेबाक लेखिका कृष्णा सोबती का आज सुबह दिल्ली में निधन हो गया।उनका जन्म  18 फरवरी 1925 में गुजरात-पंजाब में हुआ था | जो अब पाकिस्तान में एक प्रांत है,सोबती ने  अपने लेखन की शुरुआत कविता लेखन में की और फिर कथा लेखन की ओर चलीं गई , जिसमें उन्हें कई पुरस्कार भी मिले।

उन्होंने अपनी रचनाओं में महिला सशक्तिकरण और स्त्री जीवन की जटिलताओं का जिक्र किया था। सोबती को राजनीति-सामाजिक मुद्दों पर अपनी मुखर राय के लिए भी जाना जाता है।  सोबती को उनके १९६६ मे लिखे   उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’ से ज्यादा लोकप्रियता मिली, जिसमें एक विवाहित महिला की कामुकता के बारे में बात की गई थी।

2015 में देश में असहिष्णुता के माहौल से नाराज होकर उन्होंने अपना साहित्य अकादमी अवॉर्ड वापस लौटा दिया था। उनके एक और उपन्यास जिंदगीनामा को हिंदी साहित्य की कालजयी रचनाओं में से माना जाता है। उन्हें पद्म भूषण की भी पेशकश की गई थी, लेकिन उसे उन्होंने इस पेशकश  को ठुकरा दिया था।

उनके उपन्यास मित्रो मरजानी को हिंदी साहित्य में महिला मन के अनुसार लिखी गई बोल्ड रचनाओं में गिना जाता है।सोबती ने अपने उपन्यास ‘जिंदगीनामा’ के लिए 1980 में साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता था। भारतीय साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 2017 में ज्ञानपीठ से भी सम्मानित किया गया था।

उन्होंने अपना आत्मकथात्मक उपन्यास 2018 में – ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान’ जारी किया था ।कृष्णा सोबती के कुछ अन्य उपन्यास हैं  जैसे दारा से बिछुरी, मित्रो मरजानी और सूरजमुखी और कहीं नफीसा, सिक्का बादल गया और बदालम की कहानी उनकी कुछ लोकप्रिय लघु कथाएँ हैं। उनकी प्रमुख चुनी हुई रचनाएँ शामिल हैं|

पिछले कई महीनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी और अक्सर अस्पताल उन्हें आना-जाना पड़ता था। उन्होंने पिछले महीने  उन्होने अस्पताल में  ही अपनी नई किताब लॉन्च की थी। अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद वह हमेशा कला, रचनात्मक प्रक्रियाओं और जीवन पर चर्चा करती रहती थी।’

 

सोबती अपने जीवन के आखिरी वर्षों तक साहित्यिक कार्यों से जुड़ी रहीं। अपने उपन्यास में उन्होंने स्त्री जीवन की परतों और दुश्वारियों को खोलने की कोशिश की। उनके पात्रों के किरदार यथार्थ के काफी निकट होते थे। कृष्णा सोबती के कालजयी उपन्यासों में सूरजमुखी अंधेरे के, दिलोदानिश, ज़िन्दगीनामा, ऐ लड़की, समय सरगम, मित्रो मरजानी का नाम लिया जाता है।

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