क्या भाजपा के क़िले को ढाह ने के लिए सपा-बसपा का गठबंधन जरूरी था.

लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियों में उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा पूरी तरह से जुट गई है और आज मायावती और अखिलेश यादव सपा-बसपा गठबंधन (SP-BSP Alliance) का औपचारिक ऐलान कर रहे हैं.25 साल बाद दोनों पार्टियां सपा-बसपा एक बार फिर से साथ आए. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावती आज दोपहर 12 बजे एक साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस कि उत्तर प्रदेश में 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी बसपा-सपा. बाकी दो सीटें अन्य सहयोगियों के लिए और दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी जाएंगी.सपा-बसपा के साथ आरएलडी, ओपी राजभर की सुहेलदेव समाज पार्टी और कृष्णा पटेल वाला अपना दल भी होगा.

ख़बरों के मुताबिक़ बसपा-37, सपा-36, आरएलडी-3 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं एक सीट ओपी राजभर और एक सीट अपना दल को मिलेगा. हालांकि, आरएलडी 5 सीटों की मांग कर कर रही है. वही दूसरी ओर कांग्रेस की परंपरागत सीट अमेठी और रायबरेली में महागठबंधन कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा. ख़बरों के अनुसार अजित सिंह की आरएलडी ने पांच सीटें मांगकर गठबंधन का पेंच फंसा दिया है. ये पांच सीटें हैं. हाथरस, मथुरा, कैराना, बागपत, मुज़फ़्फ़रनगर.

मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के सवाल पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने हमेशा प्रधानमंत्री दिया है, मैं चाहूंगा कि इस बार भी यूपी से प्रधानमंत्री मिले. बीजेपी नेताओं द्वारा मायावती पर अशोभनीय टिप्पणियां का ज़िक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैं बता देना चाहता हूं कि मायावतीजी का सम्मान मेरा सम्मान है. उनका अपमान मेरा अपमान है.

क्या भाजपा के क़िले का विनाश करने के लिए सपा-बसपा का मिलना जरूरी था. इस गठबंधन के लिए अखिलेश दो कदम पीछे भी हटे दो कदम आगे बढ़ने के लिए .अखिलेश ने कहा कि सपा का हर कार्यकर्ता यह गांठ बांध ले कि मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा. हम समाजवादी हैं औऱ समाजवादियों की विशेषता होती है कि हम दुख और सुख के साथ होते हैं. सपा-बसपा के बिच कुछ गलतफहमियों कि वजह बीजेपी को बताया, लेकिन अपने वक्तव्य मे सबको संयम और धैर्य से काम लेने कि सलाह भी दी .अखिलेश ने कहा कि मैं मायावती जी के इस निर्णय का स्वागत करता हूं. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि अब बीजेपी का अन्त निश्चिचत है.

अखिलेश यादव के अनुसार बसपा-सपा का गठबंधन भाजपा के अहंकार को खत्म करने के लिए ज़रूरी था. अखिलेश यादव के अनुसार देश में अराजकता का वातावरण है. देश में कुशासन का माहौल है. बसपा और सपा का सिर्फ चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि बीजेपी द्वारा किये जा रहे अन्याय और अत्याचार के खिलाफ भी है. अखिलेश यादव के अनुसार बीजेपी ने उत्तर प्रदेश मे देवताओं को भी जातियों बांटना शुरू कर दिया है.

सपा-बसपा ने कांग्रेस को तरजीह नहीं दी, क्योकि उन्हे लगा कि कांग्रेस के साथ जाने से कोई खास फायदा होने वाला नहीं है. ख़बरों के मुताबिक कांग्रेस के साथ जाने से सपा-बसपा वोट शेयर पर बुरा असर पड़ता है. अगर इनके साथ नहीं जाते हैं तो सपा-बसपा के पास वोट का शेयर ज्यादा रहता है. लिहाजा इस वजह से कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखा गया है. हालांकि सपा-बसपा ने यह फैसला लिया है कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी या इस तरह की किसी भी अन्य पार्टी से गठबंधन करके चुनाव नहीं लड़ेगी जिससे उनके वोट ही कट जाए.

मायावती ने कहा कि बोफोर्स की वजह से कांग्रेस की सरकार गई थी, अब राफेल की वजह से बीजेपी की सरकार जाएगी. राफेल बीजेपी को ले डूबेगी. मायावती ने कहा कि यूपी में बीजेपी ने बेइमानी से सरकार बनाई है. जनविरोधी को सत्ता में आने से रोकेंगे. बीजेपी की अहंकारी सरकार से लोग परेशान है. जैसे हमने मिलकर उपचुनावों में बीजेपी को हराया है, उसी तरह हम लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराएंगे.

मायावती के मानना हैं कि कांग्रेस और बीजेपी की नीतियां एक जैसी है. दोनों सरकारों का हाल एक जैसा हैं. अगर हम कांग्रेस से गठबंधन करते हैं तो हमें घाटा होगा , क्योंकि कांग्रेस के समय में भी भ्रष्टाचार हुआ हैं .

मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी बीएसपी ने अंबेडकर के देहांत के बाद उनके कामो को गति प्रदान की है.हम पहले भी साथ आए थे और आज फिर चुनाव के लिए साथ आ रहे हैं. हमें उस दौरान भी चुनाव में सफलता मिली थी. इस बार भी हम सफल होंगे. हमारी मकसद सिर्फ बीजेपी जैसी सांप्रदायिक पार्टियों को सत्ता से बाहर रखने का है. हमनें उस कारवां को ऐतिहासिक सफलता भी दिलाई है. हम जातिवादी व्यवस्था के शिकार लोगों को सम्मान दिलाने का काम कर रहे हैं.

मायावती के मानना हैं कि आम जनता बीजेपी के तानाशाही रवैये से खासे नाराज हैं. इसीलिए सपा और बसपा ने देशहित को ध्यान में रहकर एक जुट होने का फैसला किया है. ये गठबंधन एक राजनीतिक क्रांति की तरह होगा जिससे लोगो के बिच नई उम्मीद जागेगी यह गठबंधन सिर्फ चुनाव के लिए ही नहीं है बल्कि उन् गरीबों, महिनलाओं, किसानों, दलितों, शोषित और पिछड़ों को उनका हक दिलाने के लिए भी एक पहल है.

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