मजदूरों के हक़ के लिए हमेशा खड़ी रहने वाली पेरिन, अब उन्हे अकेला छोड़ गई|

पेरिन दाजी की पहचान होमी दाजी की पत्नी के रूप मे भी की जाती हैं ,पेरिन दाजी और होमी छह दशकों तक एक साथ रहे और एक भी लड़ाई नहीं हुई थी दोनों मे   ! बहुत ही अद्भुत साथ था दोनों का आज मोहब्बत के महीने मे पेरिन भी चल बसी अपने साथी होमी के पास |

पूर्व कम्युनिस्ट सांसद कॉमरेड होमी दाजी की पत्नी और वरिष्ठ साम्यवादी नेता 91 वर्षीय श्रीमती पेरिन (होमी दाजी ) का बुधवार सुबह इंदौर मे निधन हो गया है। उनका मेडिकेयर हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली| उनके पार्थिव देह को दोपहर 12 बजे से उनके निवास जेल रोड पर रखा गया है। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर साम्यवादी पार्टी के कार्यालय शहीद भवन, न्यू देवास रोड में 3 से 4 बजे तक रहेगा। वहां से उनकी अंतिम यात्रा शाम 4 बजे मालवा मिल मुक्तिधाम जाएगी।

हुकुमचंद मिल के मजदूरों के हक के लिए भी उन्होंने पुरजोर आवाज़ उठाई थी| उन्होंने मजदूरों के लिए न केवल पुराने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, बल्कि काले झंडे दिखाने की भी तैयारी कर ली थी| हुकुमचंद मिल मजदूरों के लिए वे प्रधानमंत्री को भी गुजराती में चिट्ठी लिख चुकी थीं| उन्होंने हुकुमचंद मिल के 5895 पूर्व कर्मचारियों के बकाया को लेकर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी पत्र लिखा था|

पेरिन मजदूरों की आस थी ,साहस थी उनका होसला थी |मजदूरों के हक़ के लिए हमेशा खड़ी रहने वाली पेरिन अब उनको अकेला छोड़ गई|5,000 से अधिक पूर्व मिल कर्मी 229 करोड़ रुपये की बकाया राशि पाने के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।मजदूरों की आवाज़ बन पेरिन हमेशा साथ खड़ी रही उनके |

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