मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन ,हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है , शबनम हाश्मी

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परवीन अर्शी नई दिल्ली से

आज दिल्ली के जंतर मंतर पर हुआ ईवीएम विरोधी प्रदर्शन |भारत छोड़ो दिवस के दिन ,याने अगस्त 9 को मंडी हाउस से जंतर मंतर तक ईवीएम का फुट मार्च भी किया गया ,जिसमे लगभग ५०० के करीब लोग शामिल हुए |शबनम हाश्मी के नेतृत्व मे कई जाने माने चेहरों ने हिस्सा लिया | शबनम हाश्मी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं बस यूँ समझा जाये की जानता की आवाज़ हैं, गरीबो के हक़ के लिए लड़ने वाली एक ऐसी महिला हैं जो लाख विरोधी ताकतों के विरोध को झेलते हुए भी आगे बढ़ने की हिम्मत ताकत और हौसला रखती हैं |इस मौके पर डॉ रहत इन्दोरी का यही शेर याद आ रहा हैं की..

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है |

सं 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ईवीएम में हेरफेर पर संदेह एक से अधिक बार सामने आया, विशेष रूप से मजबूत कमरे आदि के बाद, जीन मकानों मे संचयित किया गया था, उन मकानों को असुरक्षित पाया गया, छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आती रहीं। चुनाव आयोग ने भारत की अस्पष्ट प्रतिक्रियाओं से संदेह स्पष्ट नहीं किया, इससे हालात और बिगड़ गए।आज का दिन याने 9 अगस्त, भारत छोड़ो दिवस, विरोध प्रदर्शन के दिन मे तब्दील होगया था |

जिसमें नारा था EVM भारत छोड़ो, भारत बचाओ, लोकतंत्र बचाओ का आह्वान किया गया है। बुधवार को भी , भारतीय महिला प्रेस कोर, दिल्ली में ईवीएम विरोधी राष्ट्र जन आंदोलन ’द्वारा एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया था।

9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन दिवस, मंडी हाउस से जंतर मंतर तक विरोध मार्च आयोजित करने का फैसला किया गया था । सुबह 11.00 बजे शुरू होने वाले इस विरोध प्रदर्शन में कई ईवीएम विशेषज्ञ, कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता जैसे शरद यादव, संजय सिंह, दानिश अली आदि शामिल हुए थे ।

2019 के चुनावों में मोदी सरकार की अभूतपूर्व जीत, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की खराबी के साथ एक बार फिर से ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए और कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और नागरिक अधिकार संगठनों को एक साथ लाकर पेपर बैलेट वापस लाने की मांग की। उसी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

पत्रकार पूनम अग्रवाल द्वारा ईवीएम परिवहन वाहनों के जीपीएस डेटा प्राप्त करने के लिए दायर आरटीआई का संदर्भ दिया, जैसा कि ईसीआई द्वारा अनिवार्य किया गया था। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरटीआई के जवाब से यह भी पता चला है कि ECI के पास 2019 के चुनावों में गिने जाने वाले VVPAT स्लिप की संख्या के आंकड़े तक नहीं हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 2017 के उत्तराखंड चुनावों के विवाद को भी उठाया, जिसके दौरान चिप को संभालने और ईवीएम को बनाए रखने के लिए एक निजी कंपनी को टेंडर दिए जाने की खबरें थीं। यह कहते हुए कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य के चुनाव को संभालने के लिए ECI के पास अपने कर्मचारी नहीं थे, बालाजी ने एक पेचीदा सवाल उठाते हुए पूछा, “हम फिर कैसे विश्वास कर सकते हैं कि 2019 के चुनाव संविदात्मक नहीं थे?”

सवाल यह भी उठाये गए की मतपत्र प्रणाली अधिक पारदर्शी है और यदि “आप (भाजपा) नैतिक रूप से ईवीएम के माध्यम से जीत सकते हैं, तो आप जीतेंगे ,भले ही मतपत्र प्रणाली हो। ईवीएम के समर्थन में बीजेपी अचानक क्यों है, इसके बावजूद 2012 से पहले इसका जोरदार विरोध किया गया था? ”

एनी राजा ने भी ये बात कही थी कि ईवीएम एक मतदाता को संतुष्ट नहीं करती है क्योंकि वह इस बात को लेकर अनिश्चित रहता है कि क्या वोट सही व्यक्ति के पास गया है या नहीं ,और इससे नागरिकों को बहुत निराशा हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि लापता मशीनों की रिपोर्ट के साथ ईवीएम की अनधिकृत हैंडलिंग, स्पष्ट रूप से एक सबूत है कि पार्टी ने कुछ दुर्भावनाओं का सहारा लिया है। उन्होंने आगे कहा, “ईसीआई सर्वकालिक निम्न स्तर पर गिर गया है।” उन्होंने आखिरकार “हमारे भागीदारी लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान करने के लिए वापस जाने की अपील की।”

शबनम हाश्मी ने कहा, की “ इस चुनाव में ईवीएम में हेरफेर सबसे अधिक और निराशाजनक रहा है। ”शबनम ने बताया की ईवीएम के खिलाफ उनका विरोधी रुख इसलिए नहीं है ,क्योंकि एक विशेष राजनीतिक दल सत्ता में आया है, बल्कि इसलिए कि हमारे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है और हमारे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ हैं |आज का ये विरोध प्रदर्शन काफी हद तक सफल कहा जा सकता हैं जिसमे हर उम्र का व्यक्ति नज़र आ रहा था और अपनी अपनी बाते सांझा कर रहा था |

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