नाम से भी पॉपुलर, काम से भी पॉपुलर, को मिला काका हाथरसी पुरस्कार

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क्या हैं काका हाथरसी सम्मान ?
आज ही के दिन हर साल दिल्ली स्थित “हिंदी अकादमी” साहित्यिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वार्षिक काका हाथरसी पुरस्कार प्रदान करता है।और इस बार पॉपुलर मेरठी को चुना गया इस सम्मान के लिए |पॉपुलर मेरठी , को मिला काका हाथरसी सम्मान |

नई दिल्ली के जामिया हमदर्द विशश्वविद्यालय मे आयोजित कार्यक्रम मे पॉपुलर मेरठी , को मिला काका हाथरसी सम्मान | इस बार पॉपुलर मेरठी को चुना गया इस सम्मान के लिए |

कहते हैं ना किसी को रुलाना बहुत आसान हैं ,लेकिन रोते हुए को हसाना बेहद मुश्किल काम हैं |चंद मिनटों के लिए ही सही ,लेकिन इंसान पॉपुलर मेरठी की शायरी सुनकर अपना ग़म भूल जाता हैं ,जोड़ लेता हैं खुद को उनकी शायरी के साथ | पेशे से मज़ाकिया शायर ज़रूर हैं | लेकिन हकीकत मे बेहद संजीदा और ज़मीन से जुड़े इंसान हैं |शांत स्वाभाव चीज़ो को गहराई से सोचने ,समझने का सलीका आता हैं उन्हे |

डॉ पॉपुलर मेरठी का जन्म 9 अगस्त 1953 (64 वर्ष), मेरठ, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था।  उनका असली नाम एजाज़ शाह हैं  | वह श्री सैयद निजामुद्दीन शाह और उनकी माँ श्रीमती सैयदा अख्तरारी बेगम के पुत्र हैं। उन्होंने मेरठ कॉलेज मेरठ, 1980 की कक्षा, नई दिल्ली, में पढ़ाई कि। वह मेरठ में रहते हैं। वह एक कवि और लेखक के रूप में काम करते हैं, उनके लेखन को पूरी दुनिया में जाना जाता है |

डॉ पॉपुलर मेरठी, लोकप्रिय कवि हैं। उन्होंने उर्दू भाषा में कई कवितायेँ लिखी । उन्होंने उर्दू भाषा पर भी कुछ किताबें लिखीं। वह दुनिया के कई लोगों द्वारा अपने हास्य शायरी और उनके गीतों से जाने जाते है।

उन्होंने उर्दू भाषा में कई कविताएँ लिखी हैं और वे अंतर्राष्ट्रीय उर्दू कवि भी हैं। वह आठ नज़्मों के लेखक हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया के अधिकांश लोगों को प्रेरित किया लेखन की और ।

उन्होंने अपना जीवन कविताओं के लिए बलिदान कर दिया। उनका भाई श्री सैयद सलीमुद्दीन शाह है, वह ज्यादातर समय अपने बच्चों के साथ बिताते हैं। कई साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठन जो कि प्रसिद्ध हैं, ने उन्हें सम्मानित किया है। उनके आठ नाज़िम “आत्मान्वशाहर”, “एगाम-ए-दिल्किरकुनैवाहशात-ए-दिलकीकरुन,” ए-जान दर, “” डाकुकी सम्मेलन “आदि हैं। उनके आठ नाज़िम ऑनलाइन में भी उपलब्ध हैं।

उनका मुख्य जीवन घटना कवि और लेखक बनना है, और वे सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य तक पहुंच गए। वह मुख्य रूप से हिंदी भाषा को पसंद करते हैं। वह एक किताब के लेखक भी हैं।

क्या हैं काका हाथरसी सम्मान ?
आजही के दिन हर साल दिल्ली स्थित “हिंदी अकादमी” साहित्यिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वार्षिक काका हाथरसी पुरस्कार प्रदान करता है।और इस बार पॉपुलर मेरठी को चुना गया इस सम्मान के लिए |

काका हाथरसी भारत के हिंदी व्यंग्यकार और हास्य कवि थे। उनका असली नाम प्रभु लाल गर्ग था।

उनका जन्म 18 सितंबर 1906 को हुआ था| उन्होंने कलम नाम काका हाथरसी के तहत लिखा। उन्होंने “काका” को चुना, क्योंकि उन्होंने एक नाटक में चरित्र निभाया, जिसने उन्हें लोकप्रिय बना दिया | उनके श्रेय में 42 काम हैं, जिसमें विभिन्न प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित हास्य और व्यंग्य कविताओं, गद्य और नाटकों का संग्रह शामिल है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत पर कलम नाम “वसंत” के तहत तीन किताबें भी लिखीं।

1932 में उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य पर पुस्तकों के लिए एक पब्लिशिंग हाउस, 1935 में एक मासिक पत्रिका संगीत प्रकाशित करना शुरू किया। 78 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रहा है। काका हाथरसी की कई प्रतिभाएँ थीं – एक लेखक, कवि, संगीतकार, संगीतज्ञ, अभिनेता और एक बेहतरीन चित्रकार के रूप में।

वे हिंदी कवि सम्मेलन के नियमित कलाकार थे। वास्तव में, वह कवि सम्मेलनों में से एक ऐसे कवी थे जिन्होंने कवि सम्मेलन के मंच पर ही हास्य कविता की स्थापना कर लेते थे ।उन्हें 1985 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

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