नरेंद्र भंडारी ने लोगो के सपनो को एक दिशा दी हैं, ऑनलाइन मीडिया के ज़रिये

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वर्किंग जॉर्नलिस्ट ऑफ़ इंडिया का संसद का घेराव व धरना प्रदर्शन दिल्ली के जंतर मंतर पर, खबरों मे रहने वाले खुद ही खबर बने आज| एक कोशिश पत्रकारों की पत्रकारों के लिए उन्हे उनका हक़ दिलाया जाए जिसके वो हक़दार हैं |सरकार तक आवाज़ पहुंचने की एक कोशिश एक पहल पत्रकारों द्वारा| आज ही के दिन १६ जनवरी २०१७ को वर्किंग जॉर्नलिस्ट ऑफ़ इंडिया का गठन हुआ था और इस के तहत कई ऑनलाइन पत्रकारों को अपने साथ जोड़कर नरेंद्र भंडारी जी ने जिस हौसले का परिचय दिए वो काबिल ए तारीफ हैं |नरेंद्र भंडारी एक ऐसे इंसान जिसने पत्रकारिता को हर गावों और जिलों से जोड़ा ऑनलाइन मीडिया के ज़रिये| जिन गावों के लोगो के लिए पत्रकार बनना असंभव सा था| उनके सपनो को एक दिशा दी हैं |

व्हाट्सप्प के ज़रिये मीडिया न्यूज़ ग्रुप की शुरुआत कर वो कदम उठाया जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं|मीडिया डायरेक्टरी से लेकर मीडिया जॉब्स और समस्याओ के समाधान तक सब कुछ संभव कर दिखाया मोबाइल के ज़रिये |आज नए पीढ़ियों की उम्मीद हैं नरेंद्र भंडारी जी हौसला हैं उन टूटे हुए सपनो का जिन्हे देखने की हिम्मत भी नहीं कर सकते थे लोग| आज के कार्यक्रम का मकसद सरकार तक आवाज़ पहुंचना था |पत्रकारों की समस्याओ और उनसे जुड़े मुद्दे चाहे वो पेंशन हो gst का मुद्दा हो या फिर सरकारी मान्यता प्राप्त करने की समस्या हो |एक ज्ञापन दिया जायेगा सरकार को ताकि सभी पत्रकारों को सरकारी सहायता प्राप्त हो और छोटे पत्रकार भी हिस्सा बने सरकारी नीतियों का |

आज के कार्यक्रम का संचालन उदय कुमार मन्ना ने किया जो की खुद भी सकारात्मक सोच का अभियान चला रहे हैं RJS ग्रुप द्वारा लोगो मे सकारात्मक सोच का सन्देश देते उदय का मक़सद हैं की सकारात्मक सोचना और उसी सोच के साथ काम करना | संजय सिंह की देख रेख मे कार्यक्रम संपन्न हुआ जो की कई दिनों से इस कार्यक्रम की रूप रेखा को तैयार कर रहे थे |नरेंद्र भंडारी ने अपने सम्बोधन से सबको साहस दिया और कर्मठता से अपने काम को करने की सीख दी|

इस मौके पर कई जानीमानी हस्तियों ने अपने अपने वक्तव्य से अपनी अपनी समस्याओ को बताया इस मौके पर शगुफ्ता टाइम्स की एडिटर परवीन अर्शी ने भी सरकार की नीतियों और न्याय प्रणाली के फैसलों मे देरी से चिंता जताई क्यों की इस से कई बड़ी बड़ी संस्थाओ द्वारा पत्रकारों पर हो रहे अत्याचारों पर कोई अंकुश लगता नज़र नहीं आ रहा हैं |

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