‘राष्ट्रोवाद का मुद्दा बना हथियार ,और फिर जीत गया जनता का प्यारा चौकीदार

 

परवीन अर्शी

सियासत मे ये जानना ज़रूरी हैं की आप को कितने लोग पसंद करते हैं और कितने आपके विरोधी हैं और यही बात टीम मोदी ने बखूबी समझा और उनकी रणनीति ने जात व जमात की हवा निकालकर चुनाव को विकास व राष्‍ट्रवाद के मुद्दों पर लड़ा । चोकीदार चोर हैं जैसे  जुमलों  ने मोदी का कद और बढ़ा दिया | हर आम और ख़ास आदमी आगया मोदी के साथ |प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुशकिस्मती थी की जनता ने उन्हे पसंद किया और विरोधी महज कोसने मे लगे रहे।

पिछली चुनावो मे वे एक विजेता थे, इस बार  जन नायक बन गए। ऐसा नायक, जिसने विपक्ष की हवा निकाल दी। अगर कोई मुद्दा रहा तो वह था ‘राष्‍ट्रवाद का मुद्दा ।’ लोगो को मोदी मे दिखा निर्भीक व निष्कलंक नायक| पिछली बार ‘मोदी लहर’  थी। इस बार मोदी मुद्दा बन गए तो वह नेतृत्व की कमी का परिणाम रहा। जनता को मोदी के अलावा देश का नेतृत्व करने के लिए कोई और चेहरा नज़र नहीं आया |

विफल हुई विपक्ष की राजनीति, काम को अंजाम देने के बजाये मोदी मोदी मे लगे रहे और उधर मोदी टीम ज़मीनी काम मे लगी रही जनता का मन बदलने में और उन्हे अपने साथ करने मे| पिछले पांच साल जुमलेबाज़ी में मशगूल रहा विपक्ष ,चुनावी दौर में भी अपने ढिलमुल रवैये से  उबर नहीं पाया। मोदी अपने नारो के साथ विपक्ष पर हावी होते गए। ‘मोदी है तो मुमकिन है’ जैसे नारों के उछलते ही विपक्ष की चुनावी रणनीति नकारात्मक होती गई |फिर तो विकास की बातें केवल मोदी और उनके सहयोगियों (एनडीए) तक सिमट कर रह गईं। भारत की  21वीं सदी की जनता के लिए जाती का समीकरण छोटा पड़ गया और इन सब से आगे बंधन टूटे और वोट जुड़ते चले गए। जनता  को ये यकिन दिलाया गया कि आर्थिक विकास के लिए किसी राष्ट्र का मज़बूत होना बेहद जरूरी है। और मोदी यही बात सबको समझा रहे थे ,अपने भाषणों के ज़रिये | चोकीदार चोर हैं जैसे जुमलों ने मोदी का कद और बढ़ा दिया ,और पब्लिसिटी दिलवा दी मोदी को | अपने ऊपर होने वाले हर प्रहार को मोदी ने चुनावी हथियार बना लिया, अपनी जीत के लिए।

विपक्ष के पास  न तो कोई रणनीति थी ना कोई चेहरा था ऐसे में मोदी के मुद्दा बनते ही एनडीए की जीत पक्की हो गई। बात करे अगर पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद से मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ और ऊपर बढ़ गया था , फिर भी विपक्ष ने सबक नहीं ली। विपक्ष के हथियार जैसे  (नोटबंदी, जीएसटी आदि मुद्दे) दिया थे उन मुद्दों को दर किनार कर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक जैसे मुद्दे जनता पर हावी हो गए थे, और मोदी जनसभाओं में बड़े ही सहजता से  इसे अपनी उपलब्धि बताते गए ।

विरोधियों ने जितना अधिक शोर मचाया वे उतनी ही तत्परता से यह साबित करते गए कि पूरा विपक्ष एकमात्र मोदी से लड़ रहा है और इस तरह हर सीट पर मोदी बनाम अन्य का मुकाबला हो गया। पार्टी और प्रत्याशी के ऊपर मोदी मुद्दा बन गए। आरक्षण और संविधान की रक्षा की दुहाई देने वालों का सूपड़ा ही साफ हो गया।

अब मोदी के सामने कई चुनौतियाँ हैं बात करे अगर मोदी सरकार की 2014-19 तक महंगाई का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन अब ईंधन और खाद्य पदार्थों के दामों में वृद्धि की वजह से महंगाई के मोर्चो पर कठिन लड़ाई लड़नी होगी। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक विकास की है। रोजगार के मुद्दे  की वजह से 2014 नरेंद्र मोदी को सत्ता दिलाई थी , लेकिन रोजगार के संकट को लेकर विपक्ष लगातार उनपर हमलावर रहा। नई सरकार के सामने रोजगार बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी। देश में हर महीने 10 लाख से ज्यादा लोग रोजगार पाने की होड़ में आ जाते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लोगों को रोजगार नहीं मिलता।

इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर मोदी सरकार ने काफी जोर दिया था। राजस्व, विदेश नीति, महंगाई ये सभी मुद्दे से भी निपटना होगा नई सरकार को, और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और कृषि संकट जैसे कई बड़े मुद्दे भी होंगे सरकार के सामने स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य समस्याओं से निपटने पर भी मुस्तैदी से लगना होगा।

सामाजिक मोर्चे पर भी सामंजस्य बिठाए रखने  की चुनौती होगी मोदी सरकार पर ।अब जनादेश तो मिल गया अब एक नायक की तरह अपने विरोधियों की आशाओ पर खरे उतर कर देश की जानता को और देश को तरक्की की और ले जाना होगा मोदी को ,असली परीक्षा तो अब शुरू हुए हैं मोदी की |

 

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