सदियों पुरानी परंपरा टूटी, सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं ने किया प्रवेश

सबरीमाला मंदिर में आज 40 साल की दो महिलाओं ने सुबह भगवान अयप्पा के दर्शन किए. सादी वर्दी में आईं दोनों महिलाओं के साथ प्रवेश के समय पुलिस भी थी.महिलाओ ने आधी रात में ही पहाड़ी की चढ़ाई की. सुबह पौने चार बजे इन दोनों महिलाओं ने मंदिर की सीढ़ियां चढ़नी शुरू की, दर्शन किए और चुपचाप सबरीमाला से निकल गईं.महिलाओं के दर्शन करने के बाद मंदिर के आसपास तनाव की स्थिती बनी हुई है. सबरीमाला मंदिर को 2 दिनों के लिए बंद कर दिया गया था. हालांकि,सबरीमाला मंदिर को शुद्धिकरण के लिए एक घंटे के लिए बंद किया गया था शुद्धिकरण के बाद मंदिर के पट खोल दिए गए हैं|

इस बीच दो महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर सियासी पार्टियां अपनी राजनीतिक जमीन के हिसाब से इस परंपरा के समर्थन और विरोध में खड़ी नजर आ रही हैं.इन दोनों महिलाओं के नाम बिन्दू और कनकदुर्गा हैं जिन्होने भगवान अयप्पा के दर्शन किए. ये महिलाएं उसी आयु वर्ग की हैं, जिस पर अब तक प्रतिबंध लगा हुआ था. हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने पर लगी रोक को हटा दिया है, लेकिन इसके बावजूद कुछ संगठनों द्वारा न्यायालय के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर रोक है. सुप्रीम कोर्ट ने समानता के अधिकार के आधार पर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर रोक को हटा दिया था. उसके बाद भी इस मंदिर में महिलाओं को एंट्री नहीं मिल रही थी.

ख़बरों के अनुसार केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने इस खबर की पुष्टि की हैं की महिलाओं ने मंदिर में दर्शन किए हैं| केरला पुलिस ने मल्लापुरम में मंदिर में दर्शन करने वाली महिला कनकदुर्गा के घर की सुरक्षा में पुलिस बल की तैनाती की है ताकि उन्हें किसी प्रकार का नुकसान न झेलना पड़े. ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई बार महिलाओं ने भगवान अय्यपा के दर्शन की कोशिश की, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी.

कांग्रेस नेता रंजीत रंजन ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में दर्शन करने वाली दोनों महिलाओंके इस कदम को सराहा हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई बार महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की कोशिश की. लेकिन, कामयाबी नहीं मिली. इस कोशिश में हिंसक झडपें भी हुईं. बता दें कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले पर सुनवाई के लिए बनी 5 जजों की पीठ में एकमात्र महिला जज ने इसका विरोध किया था. महिला जज इंदु मल्होत्रा ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा था कि अदालत को धार्मिक मुद्दों में दखल नहीं देना चाहिए.

इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर अपनी राय खुलकर रखी थी. पीएम मोदी के अनुसार देश मे कई ऐसे मंदिर हैं, जहां पर परंपरा के मुताबिक पुरुषों की एंट्री भी प्रतिबंधित है. वहां इसका पालन किया जाता है. इस पर किसी को समस्या नहीं होती. अगर लोगों की आस्था है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश न हो तो उसका भी ख्याल रखा जाना चाहिए. मोदी ने कहा कि महिला जज ने सबरीमाला मामले पर जो फैसला दिया है उसका भी आदर किया जाना चाहिए.

 

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